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Thursday, October 22, 2020
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फ्रांस में ब्रेथलाइजर जैसी मशीन से सेकेंडों में कोरोना वायरस का पता लगाने का दावा, साल के अंत तक होगी पूरी तरह तैयार



फ्रांस के ल्योन शहर स्थित एक अस्पताल में परीक्षण के तहत एक ऐसी मशीन की मदद से को विभाजित -19 की पहचान की जा रही है, जो कथित रूप से केवल सेकंडों में कोरोनावायरस को डिटेक्ट कर सकता है। यह मशीन मूल रूप से एक प्रकार के ब्रेथलाइजर की तरह काम करती है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को इस मशीन में लगी ट्यूब में सांस भरने को कहा जा रहा है। दावा है कि इसके बाद कुछ ही सेकंडों में वायरस का पता लगाया जा सकता है। वर्तमान में इस मशीन का इस्तेमाल टेस्टिंग स्टेज में है।

आंतरिक समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, तीन महीने तक दर्जनों मरीजों पर आजमाए जाने के बाद मशीन का दूसरा ट्रायल शुरू होने वाला है। दावा है कि इन तीन महीनों के दौरान मशीन से लगभग 20 लोगों में कोरोनावायरस का पता लगाने में कामयाबी मिली है। कोविड -19 बीमारी को डिटेक्ट करने का यह तरीका न सिर्फ पीसीआर मेथड से तेज है, बल्कि ज्यादा प्रतिक्रिया भी है। ल्योन के ला क्रोइक्स-रूसे अस्पताल के नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च के डायरेक्टर क्रिश्चन जॉर्ज का कहना है, 'इसका इस्तेमाल किसी आम ब्रेथलाइजर की तरह ही है। मशीन ट्यूब में छोड़ी गई सांस में मौजूद मॉलिक्यूल्स को रजिस्टर करती है और उसकी मदद से (को विभाजित -19) बीमारी का पता लगाती है। '

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वहीं, अस्पताल के आईसीयू विभाग के प्रमुख जनरल-क्रिस्टोफ रिचर्ड का कहना है कि अस्पताल इस साल के अंत तक मशीन को पूरी तरह काम में लाने लायक बनाने देना चाहता है। मशीन को लेकर उनका कहना है, 'इस प्रकार के त्वरित परीक्षण का मतलब है कि हमें सीधे ही परिणाम मिल जाएगा। इससे हमें रोगी को अस्पताल के उस क्षेत्र में शिफ्ट करने में मदद मिलेगी, जहां उसे उस समय होना चाहिए। चूंकि अब हमारे पास (कोरोनावायरस के) कुछ प्रभावी उपाचर मौजूद हैं, इसलिए जितनी जल्दी (बीमारी की) पहचान होगी, उतनी जल्दी हम इलाज कर सकते हैं। '

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लेकिन मशीन के इस्तेमाल को लेकर कुछ सीमाओं (सीमा) का भी पता चला है। मशीन की निर्माण टीम से अलग एक स्वतंत्र वायरस एक्सपर्ट ब्रूनो लीना कहती हैं कि ब्रेथलाइजर से कोरोनावायरस का पता लगाना सही दिशा में उठाया गया है, लेकिन इस अवस्था में इसका इस्तेमाल काफी एक्सपायर है, जिसके चलते अस्पतालों में इसका वितरण नहीं है। । फ्रांस के नेशनल एंटेरोवायरस एंड पेरेकोवायरस ऑरेंजेंस सेंटर की प्रमुख ब्रूनो लीना का कहना है, 'अगर हमारा अनुमान सही साबित हुआ तो दूसरी या तीसरी जनरेशन की मशीनों की कीमत कम होगी और फिर ट्रांसफर के संकेतकों तक सीधे पहुंचा जा सकेगा।'

(और पढ़ें – कोविड -19: आयात इम्यून सिस्टम का केवल एक हिस्सा, उनके लुप्त होने का मतलब इम्यूनिटी का खत्म होना नहीं-विशेषज्ञ)





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